Description
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विचित्र वीणा चित्र माला वीणा के दैवीय स्वरूप पर केंद्रित एक विशिष्ट चित्र-पुस्तक है, जिसमें देवी के अनेक रूपों को विचित्र वीणा के साथ देखा और अनुभव किया गया है। यह केवल चित्रों का संकलन नहीं, बल्कि नाद, स्वर, रूप और देवीत्व के सूक्ष्म संबंध की एक साधनामयी प्रस्तुति है। पुस्तक में देवी स्वयं की कथा कहती हैं, वह स्वयं के नादात्मिका, वीणाधारिणी, वीणावाणी, विश्व-साक्षिणी, श्रीशिवा, मातंगी, कामाक्षी, त्रिपुरसुन्दरी, सरस्वती, वाराही, कालरात्रि आदि रूपों के माध्यम से विचित्र वीणा को एक दैवी उपस्थिति के रूप में बतलाती है। यह कृति संगीत, ध्यान, आंतरिक अनुभव और दृश्य-अभिव्यक्ति का दुर्लभ संगम है।
Key Highlights:
विचित्र वीणा के दैवीय रूप पर केंद्रित विश्व की प्रथम चित्र-माला के रूप में प्रस्तुत।
देवी के अनेक रूपों के साथ विचित्र वीणा का आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक निरूपण।
संगीत, शब्द, रूप और नाद के प्राचीन संबंध की व्याख्या।
चित्र और गद्य, दोनों के माध्यम से साधना-आधारित अनुभव की प्रस्तुति।
संगीत-साधकों के लिए ध्यान, चिंतन और भाव-जागरण का विशेष महत्व।
Foreword / Preface By: डॉ. राधिका वीणासाधिका
(पुस्तक में “प्रस्तावना” स्वयं लेखिका द्वारा दी गई है।)
Table of Contents Snapshot:
प्रस्तावना
नादात्मिका
वीणाधारिणी
वीणावाणी
विश्व-साक्षिणी
श्रीशिवा
ब्रह्मांडकारिणी
चिताग्निकुण्डसम्भूता
पार्वती
मातंगी
कामाक्षी
त्रिपुरसुन्दरी
कैलाश स्वामिनी
सरस्वती
वाराही
महागौरी
कालरात्रि
कात्यायनी
स्कंदमाता
कुष्मांडा
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Contact: लोकगाथा प्रकाशन, नं. 21, मयूरेश डेल्टा, प्लॉट 1, सेक्टर 10B, उलवे, नवी मुंबई, 410206. ईमेल: lokgathaprakashan@gmail.com
Additional Note: © 2025 डॉ. राधिका वीणासाधिका. सर्वाधिकार सुरक्षित। इस प्रकाशन का कोई भी भाग लेख, चित्र, आवरण या अभिकल्प प्रकाशक की लिखित अनुमति के बिना किसी भी रूप में पुनरुत्पादित या प्रसारित नहीं किया जा सकता। पुस्तक भारत में प्रकाशित है।






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